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मशरूम की खेती कर मशहूर हो गए मामा भांजे, सत्रह वर्ष पहले हिमाचल में ट्रेनिंग ले कर लौटे बापस तो लगाया क्षेत्र में पहला कारखाना, अब दूसरों को दे रहे हैं ट्रेनिंग।

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पीलीभीत: मन मे हो विश्वास और काम की हो लगन तो सफलता मिलना निश्चित है जिसे सार्थक किया जनपद पीलीभीत की बंगाली बाहुल्य न्यूरिया के मामा भांजे ने। दोनों ने मिलकर सपनो का जो संसार बनाया उससे खुद को आत्मनिर्भर तो बनाया दुसरो को भी रोजगार मुहैया कराया। मामा भांजे की मेहनत से तैयार किया गया बटन मशरूम का कारोबार अब मण्डल के जिलों से फैलकर शरहद के पार नेपाल के काडमांडू तक अदब के साथ जाना और पहचाना जाने लगा है। मामा भांजे ने मिलकर पहले बटन मशरूम का कारखाना लगाया था जिससे उन्हें पहचान मिली अब नए किस्म की मशरूम ढींगरी (ओएस्टर) की खेती भी करने में जुट गए हैं।

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मामा- देवदत्त मण्डल

पीलीभीत मुख्यालय से मात्र पन्द्रह किलोमीटर के फासले पर स्थित कस्वा न्यूरिया से सटी बंगाली बाहुल्य न्यूरिया कालोनी में मामा भांजे के नाम से मशरूम की खेती का कारखाना है। असल मे यह कारखाना तो नहीं है पर यह सूक्ष्म कुटीर उधोग जरूर है। मामा देवदत्त मण्डल पुत्र अभिलाष मण्डल उम्र 56 वर्ष भांजा सुशांत मण्डल पुत्र कार्तिक मण्डल उम्र 38 वर्ष शुरुआती दौर में कोई काम जमाना चाहते थे तव ना तो कोई जरिया बन रहा था और ना ही कोई उपाय तव ही मामा भांजे रोजगार की तलाश में उत्तराखण्ड के पंतनगर में पहुँच गए इसी दौरान पंतनगर में कृषि मेला लगा तो दोनों कृषि मेले में पहुँच गए और वहां एक डॉक्टर से दोनों की मुलाकात हुई काम करने की इच्छा थी पर रुपये की तंगी डॉक्टर से परिचय हुआ बात आगे बढ़ी तो डॉक्टर ने उन्हें मशरूम की खेती करने की सलाह दी और बताया मशरूम की खेती कम लागत में कर अधिक मुनाफा कमा सकते हो।

डॉक्टर की ही सलाह पर हिमाचल और हरियाणा में मशरूम की खेती की ट्रेंनिग लेने गए और जब वहां से लौटे तो अपनी ही कालोनी में पैतीस हजार की लागत से मशरूम का कारखाना लगाया और पीछे मुड़कर नही देखा। यह लगभग सत्रह वर्ष पहले की बात है अब उनका कारोबार पचास लाख से ऊपर पहुँच गया है एक की जगह अब दो कारखाने बना लिए हैं।

शुरुआती दौर में मुश्किलें भी बेशुमार आई


शुरुआत में दस किलो मशरूम को बेचने में पापड़ बेलने पड़ गए थे। पूंजी कम थी इस लिए नुकसान झेलने की छमता भी नही थी मशरूम का मार्किट नया था। जैसे-जैसे जानकारी हुई तो कारोबार बड़ा। जहां दस किलो मशरूम की खपत नही थी अब कुंटलो में बटन मशरूम की पैदावार हो रही है और बचती नही है। अब तो यह माल मण्डल के सभी जिलों में पीलीभीत से लखीनपुर, बरेली से शाहजहांपुर के अलाबा दिल्ली इतना ही नही न्यूरिया की मशरूम की डिमांड नेपाल के काठमांडू तक है।

मशरूम की पैदावार में राजस्थान की मिट्टी है कारगर

ट्रे में लिए हुए राजस्थान की जिक्सन मिट्टी

इस मिट्टी के प्रयोग से बटन मशरूम की पैदावार बड़ी है। अब नए किस्म की मशरूम के उत्पादन पर मामा भांजे नजर गड़ाए है। इस बार नए किस्म की ढींगरी (ओएस्टर) मशरूम तैयार करने में जुट गए है।

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अब ढींगरी ओएस्टर मशरूम की तैयारी

ढींगरी मशरूम की पैदावार के लिए तैयार कंपोस्ट

मामा देवदत्त मण्डल और भांजे सुशांत मण्डल ने बटन मशरूम के जरिए हर घर मे पहचान बना ली है और उसकी खपत का मार्किट भी तैयार है नए सीज़न में चौदह सौ कुंतल बटन मशरूम खपने को तैयार की जा रही है तो अब एक नयी किस्म की मशरूम की पैदावार करने में भी जुट गए हैं मामा भांजे।भांजे सुशांत ने बताया बटन मशरूम का कारोबार तो बढ़ ही रहा है अब प्रयोग के तौर पर ढींगरी (ओएस्टर) मशरूम की खेती पर भी ध्यान केंद्रित किया है यह मशरूम खाने में तो स्वादिष्ट है ही इसका औषदि बनाने में भी किया जाता है।यह मशरूम ड्राई होती है इसे सही तरह से सहेजा जा सकता है।


मशरूम की खेती के लिए एसीयुक्त कारखाने का सपना अधर में लटका

आमतौर पर मशरूम की खेती सर्दी के मौसम के लिए मुफीद है।मशरूम की खेती घास फूस की बखारी बनाकर की जाती है जो सितंबर के महीने से शुरू होकर मार्च माह तक ही सीमित रहती है इसका दायरा बड़े डिमांड के हिसाब से मशरूम की पैदावार बड़ाई जाए इसके लिए 12 माह काम करने का विचार मन मे आया जानकारों से सलाह ली गई तो घास फूस की बखारी की जगह पक्की दीबार के साथ एसीयुक्त कारखाना तैयार करने की सलाह मिली तो पक्का कारखाना तैयार भी करा लिया एक वर्ष हो गया एसी लगाने के लिए पैसे की तंगी आई तो बैंक से लोन के लिए फाइल तैयार की लेकिन बैंक में फाइल ही लटक गई जिसके चलते फिलहाल एसीयुक्त मशरूम का कारखाने का सपना अधर में ही लटका हुआ है।

मशरूम की खेती खुद का रोजगार तो बनी दुसरो को भी दे रहे है रोजगार

मामा देवदत्त और भांजा सुशांत मिल कर दो खुद के मशरूम के कारखाने चलाते है जिसमे मशरूम की खेती की जाती है इस काम को करने के लिए इनके साथ साथ साठ लोगों को और रोजगार मिल रहा है इतना ही नही इनके बाद क्षेत्र भर में 250 अलग अलग स्थानों में मशरूम के कारखाने लग चुके है जिन्हें मामा भांजे ट्रेनिंग देते है साथ ही उन्हें सारा मटेरियल भी खुद देते है।

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छात्राओं ने विधायक, डीएम समेत जनप्रतिनिधियों को बांधी राखी

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पीलीभीत। रक्षाबंधन पर्व से पहले बृहस्पतिवार को मरौरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय टाह पौटा में रक्षाबंधन उत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। कार्यक्रम में बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद, जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, मुख्य विकास अधिकारी सतीश प्रसाद मिश्रा और बीएसए रोशनी सिंह पहुंचे।विद्यालय की छात्राओं ने अपने हाथों से तैयार की गई रंग-बिरंगी राखियां विधायक, डीएम, जिलाध्यक्ष, सीडीओ और बीएसए की कलाई पर बांधकर रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं। छात्राओं द्वारा बनाई गई राखियां कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहीं। राखी बांधने के दौरान विद्यालय परिसर तालियों और खुशियों से गूंज उठा। अतिथियों ने छात्र-छात्राओं को उपहार दिए और मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

👉 जमीन पर बैठकर अतिथियों ने बच्चों के साथ किया भोजन

विद्यालय में तिथि भोज का भी आयोजन किया गया। विधायक, डीएम समेत अन्य अतिथियों ने छात्र-छात्राओं के साथ जमीन पर पंक्तिबद्ध बैठकर भोजन किया। भोज में राजमा-चावल, रायता, सलाद और हलुआ परोसा गया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अपने बीच बैठकर भोजन करते देख बच्चे भी उत्साहित नजर आए।जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम और अपनत्व की भावना बढ़ती है। साथ ही उन्हें भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जानकारी भी मिलती है। उन्होंने छात्राओं द्वारा स्वयं राखियां तैयार करने की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।इस मौके पर खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार सिंह, ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य, भाजपा कार्यकर्ता-पदाधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।

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ज्ञान इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं ने डीएम को बांधा रक्षासूत्र

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पीलीभीत। रक्षाबंधन के अवसर पर ज्ञान इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं ने बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान विद्यालय की शिक्षक और छात्राएं मौजूद रहीं।जिलाधिकारी ने छात्राओं को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने छात्राओं से संवाद करते हुए कहा कि जीवन में सफलता के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच जरूरी है। समय का सदुपयोग करते हुए अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार लक्ष्य निर्धारित करें और उसे हासिल करने के लिए पूरी लगन से प्रयास करें।उन्होंने कहा कि ईमानदारी और निरंतर प्रयास से सफलता हासिल की जा सकती है। कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी ने विद्यालय के शिक्षकों, प्रबंधक और छात्राओं का आभार जताया।

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भतीजे को बचाने पहुंचे चाचा के आरोपी ने मारा मुक्का, सड़क पर सिर के बल गिरने से मौत, पोस्टमार्टम में सिर में अंदरूनी चोट से मौत की पुष्टि

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न्यूरिया। थाना क्षेत्र के बसंतापुर गांव में बुधवार शाम दो युवकों के बीच हो रही मारपीट में बीच-बचाव करने पहुंचे 46 वर्षीय किसान रामपाल की देर रात मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि झगड़ा शांत कराने के दौरान अनिल ने रामपाल के मुंह पर मुक्का मार दिया। हाथ में कड़ा पहने होने के कारण मुक्का लगने से रामपाल सड़क पर सिर के बल गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट लग गई।मृतक के पुत्र शिव कुमार ने बताया कि बुधवार शाम करीब छह बजे वह अपने पिता के साथ घर की चारदीवारी कराने के लिए रेता-बजरी के रुपये जमा कर लौट रहे थे। गांव से कुछ दूर जनसेवा केंद्र के पास उनके तयेरे भाई सूरज और गांव निवासी अनिल पुत्र भिकारी लाल के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हो गई। दोनों को अलग कराने के लिए वह और उनके पिता बीच-बचाव करने पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान अनिल ने उनके पिता के मुंह पर मुक्का मार दिया, जिससे वह सड़क पर सिर के बल गिर गए।परिजनों के अनुसार, रामपाल घटना के बाद बेटे के साथ घर चले गए और चोट को सामान्य बता रहे थे। देर रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।परिजन कुछ समझ पाते, इससे पहले ही उनकी मौत हो गई।

घटना की सूचना बृहस्पतिवार सुबह पुलिस को दी गई। थाना प्रभारी दिगंबर सिंह पुलिस टीम के साथ गांव पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के पुत्र शिव कुमार ने थाना न्यूरिया में तहरीर देकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।सीओ सदर नताशा गोयल ने बताया कि मृतक के पुत्र की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मारपीट के दौरान मृतक के सिर में चोट आई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में अंदरूनी चोट के कारण खून जमने से मौत की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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