Educations
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में एम3एम फाउंडेशन ने 28 बच्चों को दी गई छात्रवृत्ति
वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सहजीवन को बढ़ावा देने के साथ प्रभावित परिवारों के बच्चों का किया सशक्तिकरण
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व से जुड़े बाघ मित्रों और बाघ हमलों से प्रभावित परिवारों के 28 बच्चों को शनिवार को एम3एम फाउंडेशन ने छात्रवृत्ति प्रदान की। जिला वन अधिकारी कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में नर्सरी से लेकर बीएएमएस तक की पढ़ाई कर रहे 12 छात्र और 16 छात्राएं शामिल थीं। फाउंडेशन ने इस सहायता के लिए कुल 7.95 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई।
एम3एम फाउंडेशन की ट्रस्टी एवं चेयरपर्सन डॉ. पायल कनोडिया ने कहा कि वन्यजीव और इंसानों के बीच संघर्ष को कम करना संस्था की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि बाघ हमलों में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के बच्चों को शिक्षा में सहयोग देना संस्था का मुख्य उद्देश्य है।
मैनेजिंग ट्रस्टी एवं प्रेसीडेंट डॉ. ऐश्वर्य महाजन ने कहा कि बाघ मित्र जंगलों में सुरक्षा की अहम कड़ी हैं और उनके बच्चों व प्रभावित परिवारों को सहायता देना फाउंडेशन का कर्तव्य है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ मनीष सिंह ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा ही भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने एम3एम फाउंडेशन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के साथ-साथ मानव-वन्यजीव सहजीवन को भी मजबूत करता है।

एम3एम फाउंडेशन अपने वन जीवन प्रोग्राम के तहत पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ एक्सप्रेस सहित कई योजनाओं पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना और सहजीवन को बढ़ावा देना है।एम3एम फाउंडेशन की यह पहल बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण और सहजीवन को मजबूत करने का उदाहरण है।इस अवसर पर डीएफओ मनीष सिंह के आलावा एम3एम फाउंडेशन के आशीष अग्रवाल, आशीष मेहरा, जाविद मीर भी उपस्थित रहे।
Educations
मिशन शक्ति फेज-5: पुलिस लाइन पीलीभीत में छात्राओं व महिलाओं की दौड़ प्रतियोगिता आयोजित
पीलीभीत। नारी शक्ति के सम्मान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिशन शक्ति फेज-5 के तहत रविवार को पुलिस लाइन परेड ग्राउंड, पीलीभीत में छात्राओं और महिलाओं की दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन पुलिस अधीक्षक पीलीभीत के निर्देशन में और सहायक पुलिस अधीक्षक सुश्री नताशा गोयल के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों को महिला सुरक्षा से संबंधित हेल्पलाइन नंबरों 1090, 112 और 181 की जानकारी दी और महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं और महिलाओं ने परेड ग्राउंड में बने सेल्फी पॉइंट पर खड़े होकर यादगार पल भी साझा किए।

सुश्री गोयल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण समाज की प्रगति की आधारशिला है। उन्होंने महिलाओं को शासन द्वारा संचालित योजनाओं और मिशन शक्ति अभियान की जानकारी दी और स्वास्थ्य एवं आत्मरक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं और महिलाओं ने भाग लेकर नारी शक्ति का संदेश फैलाया। प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए पुलिस अधिकारियों और प्रतिभागियों की सराहना की गई।

Breaking News
अब नौकरी के लिए नही भटकेंगे ग्रेजुएट छात्र
नई दिल्ली : विश्वविद्यालय और कॉलेज से B.A., Bsc, Bcom जैसी नॉन-टेक्नीकल डिग्री पास करने वाले छात्र को आने वाले दिनों में नौकरी के लिए नही भटकना पड़ेगा | भारतीय सरकार ने सभी छात्रों को हुनरमंद बनाने का फैसला किया है और साथ ही साथ उन्हें रूचि के अनुसार क्षेत्र में स्किल से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जायेगा जो कि पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा |
श्रेयस योज़ना से होगा नॉन टेक्निकल छात्रों को फायदा
बेरोजगार युवाओ की संख्या को बढ़ता देखा मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसे लेकर “श्रेयस” स्कीम फॉर हायर एजुकेशन बूथ इन अप्रेटिस एंड स्किल नाम की योज़ना शुरू की है |
जिसके तहत यूजीसी ने हाल ही में इसे लेकर सभी विश्वविद्यालय और कॉलेज को अभियान चलाने के निर्देश दिये है जो कि अगस्त के पहले बैच को प्रशिक्षण देने का काम शुरू होगा जिसकी तैयारी तेज़ी से चल रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा जा सके |
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- अब नौकरी के लिए नही भटकेंगे ग्रेजुएट छात्र
2022 तक 50 फीसदी छात्रों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य
योज़ना के तहत 2022 तक सारे विश्वविद्यालय और कॉलेजो से निकलने वाले पचास फीसदी नॉन टेक्निकल डिग्रीधारी छात्रों को हुनर मंद बनाने का लक्ष्य रखा है यूजीसी ने छात्रों की मदद के लिए कुछ इंटर्नशिप क्षेत्र की कंपनियों को मुहीम से जोड़ा है |
जिससे योज़ना से जुड़े छात्रों को कुछ पैसे मिलेंगे जिसका कुछ हिस्सा सरकार की तरफ से और कुछ हिस्सा उधोग की तरफ से मिलेंगा |
वर्तमान समय में B.A. , Bcom, Bsc जैसे डिग्रीधारी को रोज़गार की लिए भटकना पड़ता है इसकी मुख्य वजह होती है कि उनके पास कोई स्किल का न होना |
अब इस योज़ना के छात्रों को छह माह से एक साल उनकी रूचि के अनुसार ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि छात्रों को अच्छी कंपनी में आसानी से अच्छी नौकरी मिल सके |
भारत सरकार ने बेरोजगारी को रोकने के लिए मुहीम शुरू की जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगो को रोजगार मिल सके |
श्रेयस योजना में कौन कौन हिस्सा ले सकते है
इस योजना में BA, Bsc, Bcom, आदि Non-Technical ग्रेजुएशन में लास्ट साल में इस योज़ना में जुड़ सकते है | जिससे ग्रेजुएशन पूरी होने पर आसानी से नौकरी कर सके |
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