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स्पिन के जादूगर” शेन वॉर्न: क्रिकेट इतिहास के महानतम लेग स्पिनर के 10 अनमोल किस्से

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“क्रिकेट इतिहास में अगर किसी एक गेंदबाज ने अपनी फिरकी से दुनिया को चौंकाया, तो वह थे ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज लेग स्पिनर शेन वॉर्न। मैदान पर उनकी जादुई गेंदबाजी, बेहतरीन रणनीति और करिश्माई व्यक्तित्व ने उन्हें क्रिकेट जगत का एक अमिट सितारा बना दिया। आइए जानते हैं शेन वॉर्न के जीवन के 10 अनोखे और ऐतिहासिक किस्से:

1️⃣ “स्पिन का जादूगर”

शेन वॉर्न को क्रिकेट इतिहास का सबसे महान लेग स्पिनर माना जाता है। उनकी गुगली, फ्लिपर और लेग ब्रेक इतनी खतरनाक थी कि दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज भी उनके सामने परेशान नजर आते थे।

2️⃣ “बॉल ऑफ द सेंचुरी”

1993 में एशेज सीरीज के दौरान, इंग्लैंड के माइक गैटिंग के खिलाफ डाली गई गेंद को “बॉल ऑफ द सेंचुरी” कहा जाता है। यह गेंद ऑफ स्टंप के बाहर गिरकर इतनी घूमी कि उसने गैटिंग का स्टंप उड़ा दिया, जिसे देखकर क्रिकेट जगत हैरान रह गया!

3️⃣ 1000+ इंटरनेशनल विकेट

शेन वॉर्न टेस्ट और वनडे मिलाकर 1001 इंटरनेशनल विकेट लेने वाले पहले लेग स्पिनर बने। यह कारनामा आज भी किसी और लेग स्पिनर ने नहीं किया है!

4️⃣ IPL में राजस्थान रॉयल्स को चैंपियन बनाया

2008 में जब आईपीएल की शुरुआत हुई, तब शेन वॉर्न राजस्थान रॉयल्स के कप्तान और कोच थे। उनकी कप्तानी में राजस्थान की टीम ने सभी को चौंकाते हुए पहले ही सीजन में ट्रॉफी जीत ली!

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5️⃣ 1999 वर्ल्ड कप हीरो

1999 क्रिकेट वर्ल्ड कप में शेन वॉर्न ने अपनी फिरकी से कहर बरपाया और टूर्नामेंट के बेस्ट प्लेयर बने। उनकी गेंदबाजी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड कप जीता।

6️⃣ मैदान के बाहर भी सुर्खियों में रहे

शेन वॉर्न का करियर जितना सफल था, उतना ही विवादों से भी भरा रहा। फिटनेस इशूज, स्टेरॉयड विवाद और उनकी पर्सनल लाइफ अक्सर मीडिया की सुर्खियों में रही।

7️⃣ सचिन तेंदुलकर से ऐतिहासिक मुकाबले

शेन वॉर्न और सचिन तेंदुलकर की प्रतिद्वंद्विता क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित दुश्मनी में से एक थी। वॉर्न ने खुद माना था कि “सचिन को आउट करना सबसे मुश्किल काम है!”

8️⃣ क्रिकेट का बेहतरीन दिमाग

संन्यास के बाद, शेन वॉर्न ने कमेंट्री में भी अपना लोहा मनवाया। उनकी क्रिकेट की गहरी समझ और सटीक भविष्यवाणियाँ कमेंट्री बॉक्स में भी उनकी धाक दिखाती थीं।

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9️⃣ शानदार ऑलराउंडर भी थे

शेन वॉर्न को आमतौर पर गेंदबाज माना जाता था, लेकिन वे एक शानदार बल्लेबाज भी थे। उन्होंने 12 टेस्ट फिफ्टीज़ बनाई और कई बार टीम के लिए अहम पारियां खेलीं।

🔟 2022 में अचानक निधन से दुनिया स्तब्ध

4 मार्च 2022 को, 52 साल की उम्र में हार्ट अटैक से शेन वॉर्न का निधन हो गया। इस खबर से पूरा क्रिकेट जगत और उनके फैन्स सदमे में आ गए।

🔥 शेन वॉर्न = टैलेंट + आत्मविश्वास + करिश्माई शख्सियत

शेन वॉर्न सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि क्रिकेट की दुनिया के एक ऐसे सितारे थे, जो हमेशा याद किए जाएंगे। उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी!

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करवा चौथ के दिन उठीं दो अर्थियां, छह माह के राजवीर के सिर से उठा पिता का साया

खटीमा से मजदूरी कर लौट रहे थे दोनों युवक, बनकटी बाईपास रोड पर सड़िया पुल के पास हुआ हादसा

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न्यूरिया, पीलीभीत। करवाचौथ पर जहां सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रख रही हैं, वहीं सैजनिया गांव में दो परिवारों के घर मातम पसरा है। बुधवार रात ट्रैक्टर-बाइक की भिड़ंत में जान गंवाने वाले भानू प्रताप (28) और तंशुक राम (40) की मौत ने परिवारों की खुशियां छीन लीं। गुरुवार को करवाचौथ के दिन दोनों की अर्थियां उठीं तो हर आंख नम हो गई। भानू की मौत से उनके छह माह के बेटे राजवीर के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।हादसा बनकटी बाईपास रोड पर बीसलपुर ब्रांच नहर के सड़िया पुल के पास बुधवार रात करीब नौ बजे हुआ। सैजनिया निवासी भानू प्रताप और उनके साथी तंशुक राम खटीमा में मजदूरी करने के बाद बाइक से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान ट्रैक्टर और बाइक की भिड़ंत हो गई। हादसे में भानू ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि तंशुक राम की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया।

करवाचौथ पर पति की जगह मिली मौत की खबर-भानू प्रताप परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए खटीमा में मजदूरी करते थे। दिनभर मेहनत कर मिलने वाली मजदूरी से पत्नी सावित्री और बच्चों का पालन-पोषण करते थे। बुधवार को भी वह रोज की तरह काम पर गए थे। परिवार को उम्मीद थी कि शाम को वह घर लौट आएंगे, लेकिन हादसे ने सब कुछ बदल दिया। गुरुवार को करवाचौथ के दिन जब सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर रही थीं, तब सावित्री के सामने पति को हमेशा के लिए खो देने का दुख था। जिस जीवनसाथी के साथ उन्होंने भविष्य के सपने देखे थे, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगा। पति की मौत और तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी ने सावित्री के सामने जिंदगी की कठिन चुनौती खड़ी कर दी है।छह माह के राजवीर को नहीं मालूम,

अब कभी नहीं लौटेंगे पिता- छह माह का राजवीर अभी इतना छोटा है कि उसे पिता के होने और न होने का अहसास भी नहीं है। उसे नहीं मालूम कि अब उसे गोद में उठाकर दुलार करने वाला पिता कभी लौटकर नहीं आएगा। जिस उम्र में बच्चे पिता की उंगली पकड़कर चलना सीखते हैं, उस उम्र में राजवीर के सिर से पिता का साया उठ गया।भानू के छह वर्षीय बेटे रवि और चार वर्षीय बेटी जूही के लिए भी पिता की कमी को समझ पाना मुश्किल है। बड़े होने पर राजवीर को शायद तस्वीरों और परिवार के लोगों की बातों से ही पिता के बारे में जानना पड़ेगा।भानू अपने पीछे पिता नंदलाल, मां सावित्री देवी, पत्नी सावित्री और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। वह अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। छोटे भाई आकाश के लिए भी बड़े भाई को खोना गहरा सदमा है। बुजुर्ग माता-पिता का सहारा छिन गया तो पत्नी सावित्री के सामने बच्चों की परवरिश और उनका भविष्य संवारने की जिम्मेदारी आ गई है।

तंशुक राम के परिवार में भी पसरा मातम-हादसे में जान गंवाने वाले तंशुक राम के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था। उनकी मौत से पत्नी गंगा देवी, बेटे सूर्या और बेटी देवकी का रो-रोकर बुरा हाल है। एक ही हादसे ने दो परिवारों के सहारे छीन लिए। करवाचौथ के दिन दोनों युवकों की अंतिम विदाई से सैजनिया गांव में शोक का माहौल है।

थाना प्रभारी दिगम्वर सिंह ने बताया कि मृतकों के परिजनों की ओर से अभी कोई तहरीर नहीं मिली है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रैक्टर और बाइक को कब्जे में लेकर थाने में खड़ा करा दिया है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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पेनल्टी शूटआउट में गोला गोकर्णनाथ बनी चैंपियन, पीलीभीत को 7-6 से हराया

• नेताजी सुभाष कप-2026 के रोमांचक फाइनल में निर्धारित समय तक नहीं हो सका गोल
•गोला के गोलकीपर तारिक बने मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज

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न्यूरिया (पीलीभीत)। न्यूरिया कॉलोनी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मैदान पर शारदीय दुर्गा पूजा महोत्सव के तहत आयोजित ‘नेताजी सुभाष कप-2026’ फुटबॉल टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में बृहस्पतिवार को गोला गोकर्णनाथ ने रोमांचक जीत दर्ज की। बेहद कड़े मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट के जरिए गोला गोकर्णनाथ ने पीलीभीत को 7-6 से हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।शाम पांच बजे शुरू हुए फाइनल मुकाबले में सीटी बजते ही दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। मैच के दौरान दोनों ओर से गोल करने के कई तीखे हमले हुए, लेकिन दोनों टीमों के रक्षापंक्ति के खिलाड़ियों और गोलकीपरों ने विरोधी टीम की कोशिशों को नाकाम कर दिया। निर्धारित समय तक दोनों ही टीमें कोई गोल नहीं दाग सकीं और मुकाबला बराबरी पर छूटा।इसके बाद मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ, जहां रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया। पेनल्टी शूटआउट में दोनों टीमों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी, लेकिन आखिरकार गोला गोकर्णनाथ ने 7-6 से बाजी मार ली। जीत दर्ज करते ही गोला टीम के खिलाड़ियों और समर्थकों में जश्न की लहर दौड़ गई।

गोलकीपर तारिक का शानदार प्रदर्शन-

पूरे मैच और टूर्नामेंट में शानदार बचाव करने वाले गोला गोकर्णनाथ के गोलकीपर तारिक को ‘मैन ऑफ द मैच’ के साथ-साथ ‘मैन ऑफ द सीरीज’ के पुरस्कार से भी नवाजा गया।विजेता को 14 हजार और उपविजेता को 7 हजार रुपयेमैच में डिवाइन एलर्जी अस्थमा सेंटर एवं अनुज नर्सिंग होम, पीलीभीत के डॉ. दीपक गंगवार और उनकी पत्नी डॉ. पूनम गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

उन्होंने मैच से पूर्व खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य अतिथियों ने विजेता गोला गोकर्णनाथ की टीम को ट्रॉफी व 14,000 रुपये और उपविजेता पीलीभीत की टीम को ट्रॉफी व 7,000 रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया।

आयोजन समिति और गणमान्य लोग रहे मौजूद- नेताजी सुभाष चंद्र बोस फुटबॉल कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस टूर्नामेंट में डॉ. दीपक गंगवार, समर चंद्र राय, रामश्याम बीड़ी, दुर्गा पूजा कमेटी, ग्राम प्रशासक विश्वनाथ सरकार, अजीत डे, शिव मिष्ठान भंडार, जगत सीमेंट और डॉ. अरुण मंडल का विशेष सहयोग रहा।इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष सुब्रत दास, उपाध्यक्ष किशोर बाइन, कोषाध्यक्ष विजय सरकार, स्पोर्ट्स ऑफिसर अनुराग श्रीवास्तव, जिला स्वास्थ्य अधिकारी धीरेंद्र सिंह, रामचंद्र मंडल, डॉ. आशीष उर्फ बब्लू, निमाई मंडल, राधेश्याम, भवतोष, नित्यानंद साना, प्रकाश दास और विदुर व्यापारी सहित बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

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पुतला दहन से पहले पुलिस की कार्रवाई, अजीम समेत तीन कांग्रेसी हिरासत में

आधी रात को अजीम को पकड़ा, सुबह दो अन्य नेताओं को थाने लाई पुलिस; शाम पांच बजे छोड़ा

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न्यूरिया (पीलीभीत)। प्रस्तावित पुतला दहन कार्यक्रम से पहले पुलिस ने कांग्रेस के जिला महासचिव और नगर पंचायत न्यूरिया के वार्ड नौ के सभासद मोहम्मद अजीम समेत तीन नेताओं को हिरासत में ले लिया। अजीम को सोमवार रात करीब 12 बजे पकड़ा गया, जबकि मीडिया प्रभारी फैज नूरी और अल्पसंख्यक नगर अध्यक्ष हसरुद्दीन को मंगलवार सुबह थाने लाया गया। तीनों को शाम पांच बजे तक थाने में रखा गया।राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के आह्वान पर 20 अक्तूबर को न्यूरिया के मुख्य चौराहे पर पुतला दहन का कार्यक्रम प्रस्तावित था। अजीम ने सोशल मिडिया के माध्यम संदेश जारी कर कार्यकर्ताओं से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।अजीम के मुताबिक, संदेश सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उधर, पुलिस की घेराबंदी के बावजूद एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष राजेश वर्मा कार्यकर्ताओं के साथ कलीनगर पहुंच गए और वहां चौराहे पर पुतला दहन किया। उन्होंने सरकार पर दमनकारी नीति अपनाने का आरोप लगाया। साथ ही न्यूरिया में अजीम समेत तीन नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर भी सवाल उठाए।थाना प्रभारी दिगंबर सिंह ने बताया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा के मद्देनजर तीनों को डिटेन में किया गया था।

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