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सीएम योगी ने दिया आदेश- उत्तर प्रदेश में अब रविवार की साप्ताहिक बंदी भी खत्म, अब हर दिन खुले रहेंगे बाजार

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यूपी में कोविड की बेहतर होती स्थिति के दृष्टिगत रविवार की साप्ताहिक बंदी खत्म कर दी गई है। अब से सभी बाजार रविवार को भी ख़ुलेंगे। सीएम योगी ने कहा कि इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिया जाए। कोरोना प्रोटोकाल का सख्ती से पालन कराया जाए। प्रशासन द्वारा लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएँगी।

मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा यह समय सतर्कता और सावधानी बरतने का है। थोड़ी सी लापरवाही संक्रमण को बढ़ाने का कारक बन सकती है।

 

यूपी में अभी जारी रहेगा नाइट कर्फ्यू,  सोमवार से रविवार तक क्या रहेगी टाइमिंग जानिए

उत्तर प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति में सुधार के 22 अगस्त से रविवार की बंदी समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों तथा अन्य मंडलीय अधिकारियों को भेजे गये पत्र में कहा है कि सरकार के निर्देशानुसार 22 अगस्त से रविवार की साप्ताहिक बंदी खत्म की जाती है और अब प्रत्येक सोमवार से रविवार तक प्रात: छह बजे से रात्रि 10 बजे तक मास्क, दो गज की दूरी व सेनिटाइजर के प्रयोग जरूरी करने के साथ गतिविधियां शुरू किए जाने की अनुमति होगी। रात्रिकालीन कर्फ्यू रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लागू रहेगा।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक बाजार की पूर्व में निर्धारित साप्ताहिक बंदी यथावत लागू रहेगी। इससे पहले प्रदेश में कोरोना की स्थिति में सुधार के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से रविवार की साप्ताहिक बंदी समाप्त करने पर विचार करने को कहा था।

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वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया था, प्रदेश में कोविड की बेहतर होती स्थिति के दृष्टिगत रविवार की प्रदेशव्यापी साप्ताहिक बंदी की व्यवस्था को समाप्त किया जा सकता है। अब से सभी शहरों/बाजारों/उद्योगों/कारखानों में, कोविड काल से पूर्व में प्रभावी रही साप्ताहिक बंदी की तिथि पर अवकाश लागू किया जाए। इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिया जाए। इससे पहले 11 अगस्त को शनिवार की बंदी खत्म करने का निर्देश जारी किया गया था।

गौरतलब है कि जुलाई में, राज्य सरकार ने कोविड प्रोटोकॉल जारी किया था जिसके तहत सोमवार से शुक्रवार तक बाजार, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक काम करने की अनुमति दी गई थी, जबकि शनिवार और रविवार साप्ताहिक बंदी रखा गया था।

बयान में कहा गया कि सतत प्रयासों से कोरोना की दूसरी लहर पर बने प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ जनजीवन तेजी से सामान्य हो रहा है। आज प्रदेश के 15 जनपदों (अलीगढ़, अमेठी, बदायूं, बस्ती, देवरिया फर्रुखाबाद, हमीरपुर, हरदोई, हाथरस, कासगंज, महोबा, मिर्जापुर, संतकबीरनगर, श्रावस्ती और शामली) में फिलहाल कोविड का एक भी मरीज नहीं है।

रक्षाबंधन से यूपी पूरी तरह होगा अनलॉक, जारी रहेगा नाइट कर्फ्यू, सुबह 6 से रात 10 बजे तक खुलेंगे बाजार

प्रदेश सरकार ने रविवार की साप्ताहिक बंदी भी समाप्त करने का फैसला किया है। आगामी 22 अगस्त को रविवार के दिन पड़ने वाले रक्षाबंधन से प्रदेश पूरी तरह अनलॉक हो जाएगा। रात्रिकालीन कोरोना कर्फ्यू पहले की तरह जारी रहेगा। यह रात्रि 10 बजे से सुबह छह बजे तक होगा।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने शुक्रवार को इस बाबत शासनादेश जारी कर दिया। इसमें मास्क की अनिवार्यता, दो गज की दूरी और सेनेटाइजर के प्रयोग की शर्त के साथ पूरे सप्ताह सुबह छह बजे से रात्रि 10 बजे तक गतिविधियों की अनुमति दी गई है। प्रत्येक बाजार की पूर्व में निर्धारित साप्ताहिक बंदी यथावत लागू रहेगी। 

इससे पहले 11 अगस्त को प्रदेश सरकार ने शनिवार की साप्ताहिक बंदी समाप्त कर दी थी। तभी से सोमवार से लेकर शनिवार तक सुबह छह बजे से रात्रि 10 बजे तक गतिविधियों की अनुमति है। अब रविवार की साप्ताहिक बंदी भी समाप्त कर दिए जाने के बाद प्रदेश पूरी तरह अनलॉक हो गया है। शनिवार की साप्ताहिक बंदी समाप्त किए जाने पर व्यापारियों ने राहत की सांस ली थी। अब रविवार की साप्ताहिक बंदी भी समाप्त किए जाने पर व्यापारी संगठनों ने खुशी का इजहार किया है। रविवार को रक्षाबंधन के दिन व्यापारिक गतिविधियां ज्यादा रहती हैं। साप्ताहिक बंदी लागू रहने पर उनके सामने दिक्कतें आ सकती थीं।

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रिछा के मिन्हाज शकील को UPSC में 513वीं रैंक, 13 बेटियों समेत 53 मुस्लिम अभ्यर्थियों ने लहराया परचम

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पीलीभीत। देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा UPSC में इस वर्ष मुस्लिम युवाओं ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। घोषित परिणामों में कुल 53 मुस्लिम अभ्यर्थी सफल हुए हैं, जिनमें 13 छात्राएं भी शामिल हैं। इस उपलब्धि से सफल अभ्यर्थियों और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद की नगर पंचायत रिछा निवासी मिन्हाज शकील ने 513वीं रैंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता से परिवार और क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह है। लोगों ने मिठाई खिलाकर और बधाइयां देकर खुशी का इजहार किया।इस बार परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वालों में ए.आर. रजा मोहिउद्दीन (रैंक-7), इफरा शम्स अंसारी (रैंक-24), नाबिया परवेज (रैंक-29), हसन खान (रैंक-95), अरफा उस्मानी (रैंक-124), वसीम उर रहमान (रैंक-157), सोफिया सिद्दीकी (रैंक-253) और तोसीफ अहमद गनी (रैंक-254) प्रमुख रूप से शामिल हैं।इसके अलावा असद अकील, मोहम्मद अश्मिल शाह, शाहिदा बेगम, शादाब अली खान, मोहम्मद शोहलत खान, शोएब खान, नाजिया परवीन, शैख मोहम्मद हबीसुद्दीन, शैख मोहम्मद निशातम, साहिल सिहाग, जहाना सरीन, गुलफिजा, हाश्मी मोहम्मद उमर, शाहरुख खान, असना अनवर, मुनीब अफजल पर्रा, अजीम खान, नूर आलम, मोहम्मद इरफान कायमखानी, मोहसीना बानो, गुलाम मायादीन, मोहम्मद नायब अंजुम, मोहम्मद अबुजर अंसारी, इंशा खान, अब्दुल सुफियान खान, फैरुज फातिमा, मोहम्मद हाशिम खान, मोहम्मद सुहैल खान, तोसीफ उल्लाह खान, कोहे सफा, सना अज़मी, यासिर अहमद भट्टी, गुलाम हैदर, मोहम्मद शेजीन, मोहम्मद ऐजाजुल, अज़हर आसिफ खान, मोहम्मद सरफराज चौधरी, अब्दुल्लाह अफरीदी, मोहम्मद शाहिद रजा खान और इरफान अहमद भी सफल अभ्यर्थियों में शामिल हैं।पिछले वर्षों की तुलना में इस बार सफलता का आंकड़ा काफी बढ़ा है। पिछले वर्ष जहां 29 मुस्लिम अभ्यर्थी सफल हुए थे, वहीं उससे पहले यह संख्या 25 थी। इस वर्ष 53 अभ्यर्थियों की सफलता यह दर्शाती है कि युवाओं में शिक्षा और सिविल सेवा के प्रति रुझान तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि आने वाले समय में और अधिक युवाओं को UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित करेगी।

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मजदूर का बेटा तारिक बना असिस्टेंट प्रोफेसर, संघर्ष और मेहनत से लिखी सफलता की कहानी

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पीलीभीत। कहा जाता है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। कस्बा न्यूरिया के मोहल्ला अब्दुल रहीम निवासी मोहम्मद तारिक ने अपने संघर्ष, लगन और अथक परिश्रम से इस बात को सच साबित कर दिखाया है। मजदूर परिवार से ताल्लुक रखने वाले तारिक का चयन हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा और साक्षात्कार में सफल होने के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है।मोहम्मद तारिक के पिता सगीर अहमद मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, लेकिन वर्ष 2015 में उनके निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आर्थिक तंगी के बावजूद तारिक की मां आमना बेगम और बड़े भाई मोहम्मद रिजवान ने हार नहीं मानी। दोनों ने गुजरात में मजदूरी कर तारिक की पढ़ाई जारी रखवाई और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा प्रेरित किया। परिवार के इसी त्याग और विश्वास ने तारिक को आगे बढ़ने की ताकत दी।तारिक ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज, न्यूरिया से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की और वर्तमान में महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। वर्ष 2021 में उन्होंने सीयूईटी परीक्षा में ऑल इंडिया प्रथम रैंक प्राप्त की, जबकि वर्ष 2023 में जेआरएफ भी क्वालीफाई किया।आज तारिक अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां, भाई, चाचा मास्टर अतीक अहमद, मित्र बसीम और अपने गुरुजनों को देते हैं। उनकी सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं। तारिक की उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है और लोग उन्हें बधाई देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।

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मछली पालन से मोती उत्पादन तक: प्रमिला मिस्त्री बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

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पीलीभीत। महिला सशक्तिकरण की दिशा में न्यूरिया क्षेत्र के ब्लॉक मरौरी की प्रमिला मिस्त्री ने प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। मछली पालन से आर्थिक मजबूती हासिल करने के बाद अब उन्होंने मोती पालन (सीप खेती) की शुरुआत कर अपने उद्यम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उनका यह प्रयास न केवल उनकी आय बढ़ा रहा है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वावलंबन का सशक्त माध्यम बन रहा है।बुधवार को न्यूरिया क्षेत्र की गुप्ता कॉलोनी स्थित तालाब पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने प्रमिला मिस्त्री के मोती पालन कार्य का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रमिला जैसी महिलाएं ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ की वास्तविक पहचान हैं, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा बनती हैं।12वीं तक शिक्षित प्रमिला मिस्त्री पहले सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं। वर्ष 2019 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने मछली पालन शुरू किया और अपनी मेहनत व लगन से आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बनाई।अब सीप की खेती के माध्यम से मोती उत्पादन शुरू कर उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं। कम लागत में बेहतर आय की संभावना के कारण मोती उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। प्रमिला मिस्त्री का कहना है कि भविष्य में वे इस कार्य से अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करेंगी।डीआरपी सुनील कुमार ने बताया कि इस परियोजना में लगभग 6 लाख 20 हजार रुपये की लागत आती है। एक से डेढ़ वर्ष की अवधि में अनुबंध के तहत अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना रहती है। यदि एक बार में 10 हजार सीप डाली जाती हैं, जिनकी प्रति सीप लागत 62 रुपये है, तो प्रत्येक सीप से दो मोती प्राप्त होते हैं। इन मोतियों को 100 रुपये प्रति मोती की दर से वापस खरीदा जाता है।इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव, डीसी एनआरएलएम वंदना सिंह, डीआरपी सुनील कुमार सहित अन्य अधिकारी व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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